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Valmiki Ramayana shlok |
निरुत्साहस्य दीनस्य शोकपर्याकुलात्मनः ।
सर्वार्था व्यवसीदन्ति व्यसनं चाधिगच्छति ॥
-वाल्मीकि रामायण
अर्थ: उत्साह हीन, दीन और शोकाकुल मनुष्य के सभी काम बिगड़ जाते हैं , वह घोर विपत्ति में फंस जाता है ।
- In Hindi
Meaning: All the work of inferior, dejected and mournful person gets spoiled, he gets trapped in extreme calamity.
- In English
(2)
गुणगान् व परजनः स्वजनो निर्गुणोऽपि वा ।
निर्गणः स्वजनः श्रेयान् यः परः पर एव सः ॥
- वाल्मीकि रामायण
अर्थ: मनुष्य भले ही गुणवान् हो तथा स्वजन सर्वथा गुणहीन ही क्यों न हो, लेकिन गुणी परजन से गुणहीन स्वजन ही भला होता है । अपना तो अपना है और पराया पराया ही रहता है।
- In Hindi
Meaning: Even though a human being is a quality and a family member is absolutely poor, only a virtuous family is better than a virtuous person. He is his own and remains alien.
- In English
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